व्यक्ति विशेष- बालभारती पात्रिका के संपादक वी० वी० सुब्रमण्यम अय्यर

 व्यक्ति विशेष- बालभारती पात्रिका के सम्पादक  "वी० वी० सुब्रमण्यम अय्यर" जन्म दिवस।





' राष्ट्र प्रथम ' की भावना प्रत्येक राष्ट्र के नागरिकों में होना आवश्यक है। राष्ट्र को सर्वोच्च ध्येय मानकर ही महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, राणा कुम्भल, चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, महारानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती ने अपनें प्राणों को भी राष्ट्र हेतु अर्पित कर दिया।राष्ट्र सर्वोपरि है ऐसी भावना के क्षीण होने के कारण ही यह आर्यवृत्त, भारत  पराधीनता , दासता की जंजीरों में जकड़ा रहा। इसी कड़ी में दक्षिण भारत के एक क्रांतिकारी, पत्रकार, संपादक  वी० वी० सुब्रमण्यम जी।


वराहनेरी वेंकटेश सुब्रमण्य अय्यर एक क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त थे। उनका जन्म 2 अप्रैल 1881 को मद्रास प्रदेश के तिरुचिरापल्ली जिले में हुआ था। शिक्षा पूरी करने के बाद वे अपने जिले में वकालत करने लगे। अय्यर अधिक सफलता प्राप्त करने के उद्देश्य से पहले रंगून गए और फिर बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड गये। वहां उनकी मुलाकात गांधीजी से हो गयी। सुब्रमण्य क्रांतिकारी विचारों के व्यक्ति थे। उनका मानना था कि शस्त्रों के बल पर ही भारत को आजाद कराया जा सकता है। वे क्रांतिकारियों द्वारा अत्याचारी अंग्रेज शासकों की हत्या को स्वतंत्रता संग्राम का अंग मानते थे। अय्यर कई भाषाओं (अंग्रेजी, लैटिन, फ्रेंच संस्कृत और तमिल) के जानकार थे।


कार्य

1.वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर बहुभाषाविद् थे। उन्हें अंग्रेजी, लैटिन, फ्रेंच संस्कृत और तमिल भाषाओं का अच्छा ज्ञान था। उन्होंने 'बाल भारती' नामक तमिल पत्रिका का संपादन किया।

2. क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण फ्रांसीसी अधिकारियों ने इन्हें देश निकाला देकर अलजीयर्स भेज दिया था।



 मृत्यु - 3 जून 1925।


©️ राष्ट्रवादी साहित्य। 

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